विश्व स्तनपान सप्ताह: “पहला दूध, पहला हक” अभियान से बीजापुर की 280 माताओं तक पहुंचा जागरूकता संदेश

विश्व स्तनपान सप्ताह: “पहला दूध, पहला हक” अभियान से बीजापुर की 280 माताओं तक पहुंचा जागरूकता संदेश

बीजापुर/रायपुर:

माँ और नवजात शिशु के बेहतर स्वास्थ्य तथा कुपोषण से मुक्ति के उद्देश्य से बीजापुर के सांस्कृतिक भवन में “पहला दूध, पहला हक” अभियान के तहत एक विशाल जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में जिले की लगभग 280 माताओं और गर्भवती महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

प्रमुख बिंदु और विशेषज्ञ सलाह:

  • जन्म के तुरंत बाद कोलोस्ट्रम (पहला पीला दूध) अनिवार्य:

    बीजापुर के बीएमओ डॉ. चेलापति राव और डॉ. पटेल ने बताया कि शिशु के जन्म के प्रथम घंटे के भीतर माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाना अत्यंत आवश्यक है। यह शिशु के लिए प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाता है और संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है।

  • छह माह तक केवल स्तनपान:

    विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि जन्म से लेकर छह महीने तक शिशु को केवल और केवल माँ का दूध ही देना चाहिए। इस अवधि में पानी, घुट्टी या अन्य किसी भी खाद्य पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती। छह माह पूर्ण होने के बाद ही पूरक आहार (ऊपरी आहार) शुरू किया जाना चाहिए।

  • माँ और शिशु दोनों के लिए लाभकारी:

    स्तनपान से शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। साथ ही, यह प्रसव के बाद माँ के शीघ्र स्वास्थ्य सुधार में भी बेहद मददगार साबित होता है।

संतुलित पोषण और स्वास्थ्य देखभाल पर जोर

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने गर्भवती और धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताओं को सही पोषण की जानकारी दी:

  • पौष्टिक आहार: भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, मौसमी फल, दूध और अंकुरित अनाज शामिल करने की सलाह दी गई।

  • दवाइयों का नियमित सेवन: चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन करने का आग्रह किया गया।

अनुभव साझा और संवाद

कार्यक्रम में उपस्थित माताओं ने स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों और शंकाओं पर खुलकर सवाल पूछे। एक गर्भवती महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि माँ का दूध बच्चे के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव है, और यह जानकारी गांव-गांव में हर परिवार तक पहुंचनी चाहिए।

निष्कर्ष:

महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग का यह संयुक्त प्रयास बीजापुर में शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, कुपोषण को दूर करने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रहा है।