जशपुर के कांसाबेल में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया कमरछठ पर्व, संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा निर्जला व्रत

जशपुर के कांसाबेल में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया कमरछठ पर्व, संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा निर्जला व्रत

कांसाबेल/जशपुर:

अंचल में संतान के सुदीर्घ जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलकामना का महापर्व कमरछठ (हलषष्ठी) पूरी श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जशपुर जिले के कांसाबेल स्थित गंझूटोली पियूष सदन में महिलाओं ने विधि-विधान के साथ इस व्रत को अनुष्ठानपूर्वक संपन्न किया।

​इस पावन अवसर पर गायत्री परिवार के परिव्राजक रामकुमार थवाईत ने विशेष रूप से उपस्थित रहकर पूजन-अर्चन, संगीत और आरती संपन्न कराई, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।

हलषष्ठी माता और दाऊजी का पूजन

कमरछठ पर्व मुख्य रूप से हलषष्ठी माता और भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम (दाऊजी) को समर्पित है। इस दिन महिलाओं ने हलषष्ठी माता की विधिवत पूजा कर अपनी संतानों की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगा। पर्व की परंपरा के अनुसार, इस दौरान हल चलाने वाले बैलों और खेतों की भी विशेष पूजा की गई, जो कृषि संस्कृति के प्रति अंचल कीगाढ़ आस्था को दर्शाता है।

पसहर चावल और भैंस के दूध का विशेष विधान

कमरछठ व्रत की खान-पान से जुड़ी परंपराएं बेहद अनूठी हैं। इस दिन व्रती माताओं द्वारा बिना हल चले खेतों में स्वतः उगने वाले 'पसहर चावल' और छह प्रकार की मिली-जुली भाजी का सेवन किया जाता है। इसके अलावा, इस व्रत में केवल भैंस के दूध, दही और घी का ही उपयोग किया जाता है, जबकि गाय के दूध या उससे बनी किसी भी सामग्री का सेवन पूर्णतः वर्जित माना गया है।

गंझूटोली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आईं महिलाओं की उपस्थिति ने इस पारंपरिक लोकपर्व को सामूहिक सौहार्द और उत्सव का रूप दे दिया।