संघर्ष से स्वावलंबन: धमतरी की ‘छिपली दीदियों’ ने खड़ा किया बहुआयामी आजीविका का साम्राज्य
बकरी पालन से शुरुआत कर मिनी राइस मिल, मखाना उत्पादन और कैंटीन तक बढ़ाया दायरा; हर महिला कमा रही ₹8 से ₹10 हजार प्रतिमाह
रायपुर/धमतरी: सीमित संसाधनों और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर ग्रामीण महिलाएं किस तरह आत्मनिर्भरता का नया इतिहास लिख सकती हैं, इसकी जीवंत मिसाल पेश की है धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित ग्राम छिपली की महिलाओं ने। यहाँ की स्वावलंबी महिला स्व-सहायता समूह की दीदियों ने संघर्ष और चुनौतियों को मात देते हुए न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की है, बल्कि पूरे प्रदेश में ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण का एक रोल मॉडल बनकर उभरी हैं।
चुनौतियों को बनाया सीढ़ी, बकरी पालन से रखी नींव
समूह की अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश नंदनी साहू बताती हैं कि शुरुआत का दौर काफी कठिन था। सबसे बड़ी चुनौती गाँव की महिलाओं को एकजुट कर सामूहिक कार्य संस्कृति से जोड़ना था।
पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में दीदियों ने सबसे पहले बकरी पालन को आजीविका का आधार बनाया। शुरुआती दिनों में बाजार के उतार-चढ़ाव और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा, लेकिन हार मानने के बजाय महिलाओं ने प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य की बारीकियों को समझा। निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि आज समूह की प्रत्येक सदस्य प्रतिमाह ₹8,000 से ₹10,000 की सम्मानजनक आय अर्जित कर रही है।
आजीविका का बहुआयामी विस्तार: बकरी पालन से मिनी राइस मिल तक
बकरी पालन में मिली सफलता के बाद छिपली की दीदियों ने अपनी उद्यमशीलता को नया आयाम दिया:
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मखाना व दुग्ध व्यवसाय: गाँव के तालाब में मखाना उत्पादन शुरू करने के साथ-साथ गाय व बकरी पालन से दुग्ध व्यवसाय को गति दी। मखाना फसल के कचरे का उपयोग पशुओं के पौष्टिक चारे के रूप में किया गया, जिससे चारे की लागत घटी और दूध उत्पादन का मुनाफा बढ़ा।
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वैज्ञानिक खेती व मिनी राइस मिल: दलहन-तिलहन और फलदार वृक्षों की वैज्ञानिक खेती अपनाई। इसके अलावा गाँव में मिनी राइस मिल और कैंटीन का सफल संचालन कर दैनिक आय के पक्के स्रोत विकसित किए।
राष्ट्रीय मंच पर मिला सम्मान
छिपली की दीदियों के इस अनुकरणीय मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। समूह को केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों सम्मानित किया जा चुका है, जो इन महिलाओं के अटूट संघर्ष और सामूहिक संकल्प का सबसे बड़ा प्रमाण है।
प्रशासनिक संबल और प्रतिबद्धता
जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग का तकनीकी सहयोग दीदियों के लिए बड़ा संबल बना। जिला प्रशासन द्वारा ऐसे समूहों को बाजार, प्रशिक्षण और हर संभव विभागीय मदद देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को और अधिक मजबूत किया जा सके।














